Saturday, March 6, 2010
पापा ने कहा बोल्ड सीन करो
बॉलीवुड के बेड बॉय शक्ति कपूर उन पिताओं में से नहीं है जो अपनी बेटी को फिल्मों में काम करने से पहले ये हिदायत दे कि वो कभी बोल्ड सीन्स या अंगप्रदर्शन नहीं करेंगी|शक्ति ने साफ़ कहा है कि उन्हें अपनी बेटी श्रद्धा के बोल्ड सीन्स देने से कोई परेशानी नहीं है|शक्ति अपनी बेटी के डेब्यू को लेकर भी खासे उत्साहित हैं|उनके मुताबिक श्रद्धा को इससे अच्छा डेब्यू नहीं मिल सकता था|गौरतलब है कि शक्ति की बेटी श्रद्धा कपूर फिल्म तीन पत्ती से बॉलीवुड में कदम रख रहीं हैं जिसमें महानायक अमिताभ बच्चन भी हैं|तीन पत्ती इस शुक्रवार को रिलीज़ होने जा रही है|महंगा पड़ा किस
विवेक ओबेराय ने अपनी शीघ्र प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘प्रिंस’ में कई किसिंग सीन दिए हैं। ऐसा कह सकते हैं कि ये दृश्य उनपर अब भारी पड़ रहे हैं। पिछले दिनों गले में दर्द के अलावा उन्हें ‘किसिंग टांसिल्स’ की समस्या से भी दो-चार होना पड़ा। टांसिल्स में सूजन के कारण विवेक को फिल्म के बाबत इंटरव्यू देने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।इस उल्लू के रडार से नही बच पाओगे
इस बड़े उल्लू का गोल चेहरा रडार की तरह काम करता है जो सूक्ष्म से सूक्ष्म आवाज को भी इसके कानों तक पहुंचा देता है। इसलिए इसका शिकार अगर दबे पावं बिना आवाज करे भी चल रहा होता है तब भी उसकी आवाज को यह पकड़ ही लेता है।
देखिए फोटोग्राफर जोडी मेलानसन द्वारा कनाडा में खींची गई ग्रेट ग्रे उल्लू के शिकार की तस्वीरें...





Five Shows You Should Be Watching Looking for something good on TV?




Five Facts About Alice in Wonderland

महिला ने चार ब्रेस्ट देने वाले डॉक्टर पर किया मुकदमा
न्यूयॉर्क. ब्रेस्ट सर्जरी कराने वाली एक महिला ने डॉक्टर पर 30 लाख पाउंड (20 करोड़ 76 हजार रुपए) हर्जाने का दावा किया है। दो बच्चों की मां मारिया अलाइमो ने बताया कि अपने 40वें जन्मदिन पर उसने डॉ. कीथ बेर्मन से ऑप्रेशन कराने के लिए 4600 पाउंड खर्च किए थे। उसका दावा है कि मार्च 2003 में हुए इस ऑप्रेशन ने सुंदर बनाने की बजाय उसका रूप बिगाड़ दिया।मास्टर का 'दोहरा' ब्लास्ट
ग्वालियर। आखिरकार एक दिवसीय क्रिकेट के 39 साल के इतिहास में 2961 मैच के बाद पहला दोहरा शतक बन ही गया और इस कारनामे को अंजाम दिया इस खेल के सबसे कामयाब बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज के दूसरे मुकाबले में ग्वालियर के रूप सिंह स्टेडियम स्टेडियम को अपने बल्ले से रनों की आतिशबाजी कर गुलजार कर दिया और 147 गेंदों पर 25 चौके और तीन छक्कों की मदद से नाबाद 200 रन ठोक दिए। उनकी इस रिकार्ड तोड पारी की बदौलत भारत ने निर्धारित 50 ओवर में तीन विकेट खोकर 401 रन बनाए। जवाब में दक्षिण अफ्रीकी टीम एबी डीविलियर्स के शतक के बावजूद 42.5 ओवर में 248 रन ही बना सकी और भारत 153 रन से मैच फिर चमके गेंदबाज शुरू से रहे आक्रामक उस समय 13 ओवर का खेल बाकी था और यह तय था अगर सचिन आखिर तक टिके रह गए तो वह वनडे क्रिकेट की सबसे बडी पारी खेलने के अलावा दोहरा शतक भी जमा सकते हैं। हुआ भी ऎसा ही पार्नेल द्वारा फेंकी गई 46वें ओवर की तीसरी गेंद पर उन्होंने दो रन लेकर पाकिस्तान के सईद अनवर और जिम्बाब्वे के चाल्र्स कोवेंट्री के 194 रन के रिकार्ड को तोडा और 50वें ओवर की तीसरी गेंद पर उन्होंने अपना दोहरा शतक पूरा कर लिया। जोरदार साझेदारियां भारत के तीन बडे स्कोर जिन बल्लेबाजों को मैंने गेंदबाजी की उनमें सचिन सर्वश्रेष्ठ हैं। मुझे उनकी इस उपलब्धि पर बेहद खुशी महसूस हो रही है। गनीमत है मैं अब अंतरराष्ट्रीय मैचों में उन्हें गेंदबाजी नहीं करता। क्या शानदार पारी खेली सचिन ने। वह पहले भी दो बार दोहरा शतक बनाने के करीब पहुंचे थे तीसरी बार में उन्हें कामयाबी मिल ही गई। मुझे शुरू से यकीन था कि सचिन या सनथ जयसूर्या में से ही कोई एक वनडे का पहला दोहरा शतक बनाएगा। अब सचिन को अपने लिए और भी ऊंचा लक्ष्य तय करना चाहिए। शायद टेस्ट क्रिकेट में 450 या वनडे में 250 का लक्ष्य। इस पारी से उन्होंने साबित कर दिया कि वह वाकई महान हैं। सचिन के अंदर अभी भी एक छोटा ब“ाा है जो उन्हें आगे बढने के लिए प्रेरित करता है। अगर आप सईद अनवर से पूछेंगे तो उन्हें भी सचिन द्वारा अपना रिकार्ड तोडे जाने पर खुशी महसूस हो रही होगी। सचिन इतने सफल इसलिए हैं क्योंकि वह खेल का बहुत सम्मान करते हैं। सचिन तेंदुलकर सर्वकालिक महानतम खिलाडी हैं। इस बार में कोई संदेह नहीं रह गया है। मैं उन्हें सलाम करता हूं। वह सिर्फ ऊंचा उठ सकते हैं। वह हम सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। *अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 31,000 रन भी पूरे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 साल से अघिक समय बिताने वाले तेंदुलकर ने अब तक 166 टेस्ट मैच में 13447 रन, जबकि 442 एकदिवसीय मैचों में 17598 रन बनाए हैं। उनके नाम कुल मिलाकर 93 अंतरराष्ट्रीय शतक (टेस्ट में 47 और वन डे में 46) दर्ज हैं। एकदिवसीय मैचों में यह पांचवां अवसर है, जबकि तेंदुलकर ने 150 से अघिक रन बनाए | ||||
On Iran Sanctions, Is the U.S. Spinning Its Wheels?

- PrIran came out on top in a high-powered diplomatic simulation of the nuclear standoff held at Harvard late last year — an exercise that played out the conflict based on the real-life positions and inclinations of all the main players. Former National Security Council Iran expert Gary Sick, who led Team Iran in the exercise, wrote afterward that, for Washington, "the pursuit of sanctions in this game, as in the real world, became an end in itself, with little impact on Iran or its ability to continue [uranium] enrichment." And that appears to be a fair assessment of the Obama Administration's current Iran efforts.
डूब जाएगी दुनिया
मालदीव चाहता है कि दिसंबर में कोपेनहेगन में होने वाली बैठक में विश्व के नेता कार्बन उत्सर्जन में कटौती की संधि पर हस्ताक्षर करें। राष्ट्रपति ने इस बैठक में कहा,'अगर मालदीव को नहीं बचाया गया, तो कल दुनिया के बचने की भी उम्मीद मत कीजिए।' ग्लोबल वामिंüग के चलते पिघलते ग्लेशियर मालदीव और बांग्लादेश के लिए सबसे बडा खतरा बने हुए हैं। वैज्ञानिकों ने साफ कह दिया है कि ग्लोबल वामिंüग का पहला शिकार मालदीव ही बनेगा। खतरा सिर्फ मालदीव पर ही नहीं है, भारत के समुद्रतटीय इलाकों पर भी खतरा मंडरा रहा है। भारत के सुंदरवन डेल्टा के करीब सौ द्वीपों में से दो द्वीपों को समुद्र ने हाल ही में निगल लिया है और करीब एक दर्जन द्वीपों पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है। इन द्वीपों पर करीब दस हजार आदिवासियों की आबादी है। यदि ये द्वीप डूबते हैं तो यह आबादी भी डूब सकती है। ग्लेशियर पिघलने के खतरे से भारत और चीन चेत गए हैं। हाल ही में दोनों देशों में इस मसौदे पर बैठक हुई और तय किया गया कि ग्लेशियर पिघलने का अध्ययन करने और वास्तविक स्थिति जानने के लिए दोनों देश एक दल भेजेंगे। दोनों देशों को ये पता है कि पिघलते ग्लेशियर से कई ऎसी नदियों में बाढ आ जाएगी, जिनके किनारे लाखों लोग बसते हैं। भारत और चीन के वैज्ञानिक और पर्वतारोही अब उन ग्लेशियरों पर जाएंगे, जहां से सतलुज और ब्र±मपुत्र नदियां निकलती हैं। तिब्बत के पर्वतों से बहकर आई ये दोनों नदियां गंगा और सिंधु नदियों के साथ मिलकर उत्तर भारत और पडोसी देशों के करोडों लोगों को पानी मुहैया कराती हैं। वल्र्ड वाइल्डलाइफ फंड (डब्लूडब्लूएफ) ने हिमालय के ग्लेशियर पिघलने पर खासी चिंता जताई है। संस्था के मुताबिक ग्लेशियर पिघलने से आने वाले दिनों में करोडों लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड सकता है। यही नहीं भारत, चीन और नेपाल भयानक बाढ आ सकती है, लेकिन बाद में सूखे की स्थिति सामने आएगी। खतरा पूरी दुनिया पर है, लेकिन अभी भी विकसित देश भविष्य की इस प्राकृतिक प्रलय को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। पर्यावरण से जुडे मुद्दों पर काम करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक सदी के आखिर तक ग्लोबल वामिंüग के चलते अफ्रीका में 18 करोड 40 लाख लोगों की मौत हो सकती है। अफ्रीका में बाढ, सूखा, अकाल और संघर्ष बढ रहे हैं जो लोगों की मौत का कारण बन सकते हैं। ग्लोबल वामिंüग के चलते पिघलते ग्लेशियरों का खतरा रोकने के लिए पूरी दुनिया को एकगजुट होना होगा। क्योंकि पिघलते ग्लेशियर के खतरे का सामना आज तो केवल मालदीव ही कर रहा है, लेकिन अब भी हम नहीं संभले तो हो सकता है आने वाले वक्त में पूरी दुनिया ही डूब जाए! क्या हैं ग्रीनहाउस गैसें ग्रीन हाउस गैसों में कुल छह गैसें शामिल हैं। ये हैं-कार्बनडायऑक्साइड, मिथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, हाइड्रोफ्लोरो कार्बन, परफ्लोरो कार्बन्स और सल्फर हेक्सा फ्लोराइड। ऊर्जा उत्पादन, औद्योगिक प्रक्रिया, कचरा उत्पादन और कृषि उत्पादन के जरिए ये गैसें पर्यावरण में समाती हैं। ग्लोबल वामिंüग पर चर्चा के वक्त सारा फोकस कार्बनडायऑक्साइड पर ही डाला जाता है। लेकिन यहां ये भी ध्यान रखना होगा कि कार्बनडायऑक्साइड पेडों और वनस्पतियों का भोजन है। मालदीव डूबा, हम भी डूबेंगे: गोपाल कृष्ण ग्लोबल वामिंüग के मुद्दे पर देश विदेश में दर्जनों बैठकों में शिरकत करने वाले पर्यावरण विशेषज्ञ गोपाल कृष्ण के मुताबिक सिर्फ मालदीव के डूबने की बात करना विकसित देशों की खुराफात है। ये सच है कि ग्लेशियर पिघलने का सबसे बडा खतरा मालदीव पर है, लेकिन भारत पर भी खतरा कुछ कम नहीं है। क्योंकि भारत की कोस्टलाइन (समुद्री इलाका) बहुत बडा है। खतरा मालदीव के साथ साथ, भारत, बांग्लादेश और नेपाल पर भी मंडरा रहा है। दरअसल ग्लोबल वामिंüग और ग्लेशियर पिघलने का खतरा जी 77 में शामिल सभी 131 विकासशील देशों पर है। इसका हिस्सा भारत भी है। पर्यावरण पर काम कर रही कई संस्थाओं के सलाहकार गोपाल कृष्ण का कहना है कि चीन ने ग्लोबल वामिंüग पर जो पहल की है, वो सही है, लेकिन अमरीका की हठधर्मिता इस खतरे को और भी बढा रही है। ग्लोबल वामिंüग पिछले ढाई सौ सालों से विकसित देशों में चल रही औद्योगिक क्रांति और उससे हुए प्रदूषण का नतीजा है। इसकी जिम्मेदारी अमरीका जैसे विकसित देशों की है। गोपाल कृष्ण कहते हैं कि क्योटो प्रोटोकाल के मुताबिक 150 साल तक जिन देशों ने प्रदूषण फैलाया, उसी के चलते जलवायु में परिवर्तन हो रहा है। इनमें 37 देश शामिल हैं, इन देशों को प्रदूषण रोकना होगा। ग्लोबल वामिंüग रोकने के लिए जो कदम उठाने हैं वो विकसित देशों को उठाने हैं, विकासशील देशों को नहीं। भारत जैसे विकासशील देशों में जहां पर 83 करोड लोग 19-20 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से जीवनयापन होते हैं, उन पर ग्लोबल वामिंüग रोकने की जिम्मेदारी डालना कहां तक उचित है। पिघलते ग्लेशियर के इफेक्ट पश्चिम बंगाल का सुंदर वन खतरे में एक रिपोर्ट के मुताबिक 2020 तक पश्चिम बंगाल के सुंदर वन इलाके का 15 फीसदी हिस्सा समुद्र में मिल जाएगा। ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका में बर्फ पिघलनी शुरू हुई तो हालात और बदतर होंगे। 2000 द्वीप समुद्र में! इंडोनेशिया के पर्यावरण मंत्री इस खतरे से आगाह करते हुए कहते हैं कि ग्लोबल वामिंüग के चलते अगले 30 सालों में उनके देश के 18 हजार द्वीपों में से करीब दो हजार द्वीप समुद्र में समा जाएंगे। बढ जाएगा धरती का तापमान आईपीसीसी की पेरिस में जारी रिपोर्ट के मुताबिक साल 2100 में धरती का तापमान 1.8 से लेकर चार डिग्री तक बढ जाएगा। ये रिपोर्ट 113 देशों के 3750 पर्यावरण वैज्ञानिकों ने तैयार की है। समुद्री सतह ऊपर उठी ग्लेशियर पिघलने के चलते समुद्र सतह का स्तर छह मीटर तक बढ सकता है। 21वीं सदी के अंत तक समुद्र सतह एक मीटर तक बढ सकती है। पिछली एक सदी में समुद्र जल की सतह 15 सेंटीमीटर तक उठ चुकी है। डूब जाएगी दुनिया पिघलते ग्लेशियर्स का ड्रैकुला मुंह फाडे मालदीव को निगलने के लिए बढ रहा है। हालात इसी तरह रहे तो मालदीव जल प्रलय का पहला शिकार बन सकता है। हिंद महासागर में स्थित छोटे से देश मालदीव में ग्लेशियर पिघलने के चलते जल प्रलय का खतरा सबसे ज्यादा है। पिछले दिनों मालदीव के कैबिनेट की एक अनोखी बैठक समुद्र गहराइयों में हुई। संदेश यही था कि अगर नहीं चेते तो डूब जाएंगे। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद ने इस बैठक में साफ कहा-हम डूब रहे हैं। मालदीव चाहता है कि दिसंबर में कोपेनहेगन में होने वाली बैठक में विश्व के नेता कार्बन उत्सर्जन में कटौती की संधि पर हस्ताक्षर करें। राष्ट्रपति ने इस बैठक में कहा,'अगर मालदीव को नहीं बचाया गया, तो कल दुनिया के बचने की भी उम्मीद मत कीजिए।' ग्लोबल वामिंüग के चलते पिघलते ग्लेशियर मालदीव और बांग्लादेश के लिए सबसे बडा खतरा बने हुए हैं। वैज्ञानिकों ने साफ कह दिया है कि ग्लोबल वामिंüग का पहला शिकार मालदीव ही बनेगा। खतरा सिर्फ मालदीव पर ही नहीं है, भारत के समुद्रतटीय इलाकों पर भी खतरा मंडरा रहा है। भारत के सुंदरवन डेल्टा के करीब सौ द्वीपों में से दो द्वीपों को समुद्र ने हाल ही में निगल लिया है और करीब एक दर्जन द्वीपों पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है। इन द्वीपों पर करीब दस हजार आदिवासियों की आबादी है। यदि ये द्वीप डूबते हैं तो यह आबादी भी डूब सकती है। ग्लेशियर पिघलने के खतरे से भारत और चीन चेत गए हैं। हाल ही में दोनों देशों में इस मसौदे पर बैठक हुई और तय किया गया कि ग्लेशियर पिघलने का अध्ययन करने और वास्तविक स्थिति जानने के लिए दोनों देश एक दल भेजेंगे। दोनों देशों को ये पता है कि पिघलते ग्लेशियर से कई ऎसी नदियों में बाढ आ जाएगी, जिनके किनारे लाखों लोग बसते हैं। भारत और चीन के वैज्ञानिक और पर्वतारोही अब उन ग्लेशियरों पर जाएंगे, जहां से सतलुज और ब्र±मपुत्र नदियां निकलती हैं। तिब्बत के पर्वतों से बहकर आई ये दोनों नदियां गंगा और सिंधु नदियों के साथ मिलकर उत्तर भारत और पडोसी देशों के करोडों लोगों को पानी मुहैया कराती हैं। वल्र्ड वाइल्डलाइफ फंड (डब्लूडब्लूएफ) ने हिमालय के ग्लेशियर पिघलने पर खासी चिंता जताई है। संस्था के मुताबिक ग्लेशियर पिघलने से आने वाले दिनों में करोडों लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड सकता है। यही नहीं भारत, चीन और नेपाल भयानक बाढ आ सकती है, लेकिन बाद में सूखे की स्थिति सामने आएगी। खतरा पूरी दुनिया पर है, लेकिन अभी भी विकसित देश भविष्य की इस प्राकृतिक प्रलय को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। पर्यावरण से जुडे मुद्दों पर काम करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक सदी के आखिर तक ग्लोबल वामिंüग के चलते अफ्रीका में 18 करोड 40 लाख लोगों की मौत हो सकती है। अफ्रीका में बाढ, सूखा, अकाल और संघर्ष बढ रहे हैं जो लोगों की मौत का कारण बन सकते हैं। ग्लोबल वामिंüग के चलते पिघलते ग्लेशियरों का खतरा रोकने के लिए पूरी दुनिया को एकगजुट होना होगा। क्योंकि पिघलते ग्लेशियर के खतरे का सामना आज तो केवल मालदीव ही कर रहा है, लेकिन अब भी हम नहीं संभले तो हो सकता है आने वाले वक्त में पूरी दुनिया ही डूब जाए! क्या हैं ग्रीनहाउस गैसें ग्रीन हाउस गैसों में कुल छह गैसें शामिल हैं। ये हैं-कार्बनडायऑक्साइड, मिथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, हाइड्रोफ्लोरो कार्बन, परफ्लोरो कार्बन्स और सल्फर हेक्सा फ्लोराइड। ऊर्जा उत्पादन, औद्योगिक प्रक्रिया, कचरा उत्पादन और कृषि उत्पादन के जरिए ये गैसें पर्यावरण में समाती हैं। ग्लोबल वामिंüग पर चर्चा के वक्त सारा फोकस कार्बनडायऑक्साइड पर ही डाला जाता है। लेकिन यहां ये भी ध्यान रखना होगा कि कार्बनडायऑक्साइड पेडों और वनस्पतियों का भोजन है। मालदीव डूबा, हम भी डूबेंगे: गोपाल कृष्ण ग्लोबल वामिंüग के मुद्दे पर देश विदेश में दर्जनों बैठकों में शिरकत करने वाले पर्यावरण विशेषज्ञ गोपाल कृष्ण के मुताबिक सिर्फ मालदीव के डूबने की बात करना विकसित देशों की खुराफात है। ये सच है कि ग्लेशियर पिघलने का सबसे बडा खतरा मालदीव पर है, लेकिन भारत पर भी खतरा कुछ कम नहीं है। क्योंकि भारत की कोस्टलाइन (समुद्री इलाका) बहुत बडा है। खतरा मालदीव के साथ साथ, भारत, बांग्लादेश और नेपाल पर भी मंडरा रहा है। दरअसल ग्लोबल वामिंüग और ग्लेशियर पिघलने का खतरा जी 77 में शामिल सभी 131 विकासशील देशों पर है। इसका हिस्सा भारत भी है। पर्यावरण पर काम कर रही कई संस्थाओं के सलाहकार गोपाल कृष्ण का कहना है कि चीन ने ग्लोबल वामिंüग पर जो पहल की है, वो सही है, लेकिन अमरीका की हठधर्मिता इस खतरे को और भी बढा रही है। ग्लोबल वामिंüग पिछले ढाई सौ सालों से विकसित देशों में चल रही औद्योगिक क्रांति और उससे हुए प्रदूषण का नतीजा है। इसकी जिम्मेदारी अमरीका जैसे विकसित देशों की है। गोपाल कृष्ण कहते हैं कि क्योटो प्रोटोकाल के मुताबिक 150 साल तक जिन देशों ने प्रदूषण फैलाया, उसी के चलते जलवायु में परिवर्तन हो रहा है। इनमें 37 देश शामिल हैं, इन देशों को प्रदूषण रोकना होगा। ग्लोबल वामिंüग रोकने के लिए जो कदम उठाने हैं वो विकसित देशों को उठाने हैं, विकासशील देशों को नहीं। भारत जैसे विकासशील देशों में जहां पर 83 करोड लोग 19-20 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से जीवनयापन होते हैं, उन पर ग्लोबल वामिंüग रोकने की जिम्मेदारी डालना कहां तक उचित है। पिघलते ग्लेशियर के इफेक्ट पश्चिम बंगाल का सुंदर वन खतरे में एक रिपोर्ट के मुताबिक 2020 तक पश्चिम बंगाल के सुंदर वन इलाके का 15 फीसदी हिस्सा समुद्र में मिल जाएगा। ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका में बर्फ पिघलनी शुरू हुई तो हालात और बदतर होंगे। 2000 द्वीप समुद्र में! इंडोनेशिया के पर्यावरण मंत्री इस खतरे से आगाह करते हुए कहते हैं कि ग्लोबल वामिंüग के चलते अगले 30 सालों में उनके देश के 18 हजार द्वीपों में से करीब दो हजार द्वीप समुद्र में समा जाएंगे। बढ जाएगा धरती का तापमान आईपीसीसी की पेरिस में जारी रिपोर्ट के मुताबिक साल 2100 में धरती का तापमान 1.8 से लेकर चार डिग्री तक बढ जाएगा। ये रिपोर्ट 113 देशों के 3750 पर्यावरण वैज्ञानिकों ने तैयार की है। समुद्री सतह ऊपर उठी ग्लेशियर पिघलने के चलते समुद्र सतह का स्तर छह मीटर तक बढ सकता है। 21वीं सदी के अंत तक समुद्र सतह एक मीटर तक बढ सकती है। पिछली एक सदी में समुद्र जल की सतह 15 सेंटीमीटर तक उठ चुकी है। | ||||
प्यार का केमिकल लोचा 14 फरवरी 2010, 10:13 hrs IST ईमेल | प्रिंट | कमेंट | टेक्सट |
प्यार के पहले चरण में दिलबर के दीदार और नजदीकी पाने की तीव्र चाहत दिल की मजबूरी नहीं होती। ये सेक्स के लिए प्रेरित करने वाले टेस्टोस्टरॉन और एस्ट्रोजेन की करतूत होती है। इसके बाद आता है प्यार का वास्तविक चरण। इसमें दिन का चैन गायब हो जाता है। दिमाग की बत्ती गुल हो जाती है। प्यार के इस चरण में आदमी निकम्मा हो जाता है। दिन में भी दिलबर के ख्वाब दिखते है। शरीर की इस हालत के लिए जिम्मेदार डोपामाइन, नोरपीनेफ्राइन और सिरोटोनिन हार्मोन होते हैं। हां प्यार के इस चरण में दिल कुछ ज्यादा ही धडकने लगता है। लेकिन इसके पीछे नोरपीनेफ्राइन हार्मोन होता है। इश्क का तीसरा चरण है लगाव। इसी चरण में प्यार के रिश्ते की डोर मजबूत होती है। एक बार फिर रिश्तों की डोर मजबूत बनाने की जिम्मेदारी हार्मोन ही निभाते हैं। तंत्रिका तंत्र से निकलने वाले हार्मोन ऑक्सीटोसिन और वासोप्रेसीन रिश्तों पर फेविकोल का जोड लगाते हैं। इश्क के हार्मोन ऑक्सीटोसिन की शरीर में कई अहम भूमिका होती है। गर्भवती महिलाओं में ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्तर ज्यादा होता है। सेक्स के दौरान भी ऑक्सीटोसिन का स्तर शरीर में बढा होता है। वैसे तो रिश्तों की डोर मजबूत बनाने वाले दूसरे हार्मोन वासोप्रेसीन का मुख्य काम तो किडनी को नियंत्रित करना होता है। लेकिन जब इश्क का मामला होता है तो इनकी भूमिका बदल जाती है। प्यार का साइंस कनेक्शन अमरीका के रजर्स विश्वविद्यालय की मानवशास्त्री और प्रेम के साइंस कनेक्शन का सिद्धांत देने वाली हेलेन फिशर ने ये खुलासा किया। हेलेन ने बाकयदा इश्क के शुरूआती चरण में डुबकी लगा रहे लोगों को अपने प्रयोग का हिस्सा बनाया। उन्होंने प्रयोग में शामिल लोगों को दिमागी हलचल की तस्वीर दिखाने वाले एमआरआई स्कैनर से गुजारा। इस बीच उन्हें उनके दिलबर की तस्वीर दिखाई गई और उस पर उनकी दिमागी हलचल पर बारीकी से निगाह रखी गई। इस प्रयोग में दिमाग के उस हिस्से में हलचल देखी गई, जो मोटीवेशन और रिवार्ड से जुडा होता है। यानी इश्क के लिए दिमाग मोटीवेट करता है। प्यार के शुरूआती चरण में इमोशन से जुडे दिमाग के हिस्से में कोई हलचल नहीं देखी गई। प्यार में पूरी तरह से डुबकी लगाने यानी दूसरे और तीसरे चरण में ही इस हिस्से में हलचल दिखी। इश्क - चॉकलेट - दिमाग इश्क के शुरूआती चरण में प्रेमी जोडे नजदीकी और करीबी बढाने के लिए अक्सर तोहफे में चॉकलेट देते हैं। हालांकि इसकी कोई खास वजह नहीं होती है लेकिन वैज्ञानिकों ने इश्क और चॉकलेट के रिश्तों पर एक मजेदार खुलासा किया है। इश्क के शुरूआती चरण में दिमाग के दाहिने हिस्से में कुछ-कुछ वैसी ही गतिविधि होती है जैसा चॉकलेट खाने पर होती है। प्रेमी की दिमागी दशा जी हां, वैज्ञानिक शोधों से यह साफ हो गया है कि इश्क में पडे इंसान की मानसिक रोगियों जैसी हरकतें अनायास नहीं होती। प्यार में डूबे इंसान और मनोरोगी की दिमागी दशा एक जैसी ही होती है। दरअसल अगर मेडिकल की भाषा में बात करें तो प्यार में डूबा इंसान एक खास किस्म की बीमारी 'ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर' का शिकार होता है। इश्क के दूसरे चरण में इंसान इस बीमारी का शिकार बनता हैं। इसी चरण में प्रेमी-प्रेमिका में मनोरोग के लक्षण दिखते हैं। दीन दुनिया से बेखबर उसे बस अपने दिलबर की चिंता होती है। दरअसल इस चरण में शरीर में संवेदी सूचनाओं के डाकिए सिरोटोनिन का स्तर 40 फीसदी गिर जाता है। इसका स्तर घटने से इंसान उदासी और चिंता में डूब जाता है। इस चरण में तीव्र कामेच्छा की वजह भी सिरोटोनिन का स्तर गिरता है। दो जीनों का मिलन इश्क क्यों होता है भौतिक विज्ञानी इसे क्वांटम फिजिक्स और एनर्जी से जोडता है। गणितज्ञ इसकी वजह गणितीय फॉर्मूले को बताता है। लेकिन जीव विज्ञानी इसकी वजह जीन को बताते हैं। उनका मानना है प्यार दो दिलों का मिलन नहीं दो इंसानों के जीन के मिलन का मामला है। जीव विज्ञानियों का मानना है कि दो इंसानों के बीच आकर्षण ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजीन की वजह से बढता है। इस जीन के मिलान के बाद ही आकर्षण बढता या घटता है और इस जीन के मिलान का जरिया होती है पसीने की गंध। पुरूषों के पसीने में एंड्रोस्टेडिनोन हार्मोन निकलता है। इस हार्मोन की गंध मिलते ही महिला का दिमाग सक्रिय हो जाता है। दिमाग का अचेतन हिस्सा पसीने की गंध से रोगों से लडने की ताकत और कमजोरी का पता लगाने में जुट जाता है। इसी दौरान दिमाग ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन का भी मिलान करता है। एक अध्ययन में महिलाओं को पुरूषों के टीशर्ट सूंघने को दी गई। इस अध्ययन में सामने आया कि महिलाओं ने ऎसे पुरूषों को पसंद किया जिनके एचएलए पुरूषों के एचएलए से अलग थे। हालांकि गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने वाली महिलाएं इस गंध से प्रभावित नहीं होतीं। ब्रेकअप का मैथमेटिक्स इश्क दिमाग की केमिस्ट्री, दो जीन का मिलन है तो ब्रेकअप शुद्ध गणितीय फार्मूला है। ब्रिटेन में जन्मे और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेम्स मुरे ने ब्रेकअप के इस फॉर्मूले को ईजाद किया है। जेम्स ने दावा किया कि इस फॉर्मूले की मदद से किसी जोडे के ब्रेकअप का सटीक वक्त निकाला जा सकता है। जेम्स ने 700 शादीशुदा जोडों पर यह फॉर्मूला आजमाने के बाद अपना दावा पेश किया। इस फॉर्मूले के तहत सबसे पहले जेम्स और उनकी टीम ने नए शादीशुदा जोडों से कई मुद्दों पर 15 मिनट तक सवाल पूछे। जेम्स की टीम ने जवाबों को अलग-अलग ग्रेड दिए। जवाब देते समय संबंधित व्यक्ति की शारीरिक हरकतों जैसे दिल की धडकन, नब्ज, ब्लडप्रेशर आदि रिकॉर्ड किए गए। जेम्स की टीम ने इन्हीं भावों और शारीरिक हरकतों के आधार पर ग्रेड दिए। जैसे खुशी-खुशी दिए गए जवाबों को पॉजिटिव अंक दिए गए जबकि नाराजगी भरी आवाज या संभलकर दिए जा रहे जवाबों को निगेटिव अंक दिए गए। लव वैक्सीन इश्क के तार केमिस्ट्री और बायोलाजी से जुडे तो मेडिकल विज्ञानियों को चहकने का एक मौका मिल गया। मेडिकल विज्ञानी लव के रसायन और जीन को नियंत्रित करने के ख्वाब देने लगे। कई मेडिकल विज्ञानी तो बाकायदा भविष्य में लव वैक्सीन का दावा करने लगे। अमरीका के न्यूरोविज्ञानी लैरी यंग ने दावा किया कि प्यार के हार्मोन को नियंत्रित कर प्रेमी जोडे के इश्क की तीव्रता को घटाया या बढाया जा सकता है। इश्क की केमिस्ट्री का राज खोलने वाली डॉ. फिशर ने भी इस दावे से इंकार नहीं किया। उनका कहना था कि प्यार के दूसरे चरण को मनोचिकित्सक पागलपन की ही एक दशा मानते हैं और उस दशा में चिंता, डिप्रेशन जैसे हालात से उबरने की दवा भी देते हैं। ऎसे में भविष्य में प्यार को नियंत्रित करने को लव वैक्सीन आ जाए तो डॉ. फिशर को कोई हैरानी नहीं होगी। हालांकि कई मेडिकल विज्ञानी लव वैक्सीन को दूर की कौडी ही मानते हैं। मेडिकल विज्ञानी हार्मोन की जटिल कार्यप्रणाली को इसकी वजह मानते हैं। | ||||
















