हम मदहोश हुवे जा रहे थे
जैसे जैसे वो करीब आ रहे थे
लगा जैसे पल थम सा गया है
कोई अपना अब मिल जो गया है ..
ठंडी फुहार जैसे कुछ कह रही थी..
चांदनी जब उसके केशों को छु बह रही थी..
रात में भी सुन्हेरी धुप खिल आई थी...
सितारों की महफ़िल मैं रौशनी नयी आई थी...
उसकी अदाओं से सितारें भी मदहोश हो रहे थे..
चाँद शर्मा रहा था और वक़्त खामोश हो रहा था..
उस पल हर लम्हा थम जाना चाहता था..
उन्हें देखने चाँद भी ज़मीन पे आना चाहता था..
जैसे जैसे वो करीब आ रहे थे
लगा जैसे पल थम सा गया है
कोई अपना अब मिल जो गया है ..
ठंडी फुहार जैसे कुछ कह रही थी..
चांदनी जब उसके केशों को छु बह रही थी..
रात में भी सुन्हेरी धुप खिल आई थी...
सितारों की महफ़िल मैं रौशनी नयी आई थी...
उसकी अदाओं से सितारें भी मदहोश हो रहे थे..
चाँद शर्मा रहा था और वक़्त खामोश हो रहा था..
उस पल हर लम्हा थम जाना चाहता था..
उन्हें देखने चाँद भी ज़मीन पे आना चाहता था..



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