| शीशम सारे बबूल हुए हैं, अपने ही कांटे शूल हुए हैं। ताकत पर इतरा रहे थे, अचानक कैसे गुल हुए हैं। करतूतों का फल देखिए, सारे दिग्गज धूल हुए हैं। बहलाया मीनार दिखाकर, जुर्म सारे कबूल हुए हैं। एग्जिट ने फिर की नादानी, दावे उनके भूल हुए हैं। शब्द बाण चलाए निशदिन, वो अंगारे 'कूल' हुए हैं। दबी जंुबा से उठी चिनगारी, आंसू ही त्रिशूल हुए हैं। BHANWAR |
Friday, March 12, 2010
गजल
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