tσ ℓινє α ℓιfє ι ηєє∂ α нєαяt,
tσ нανє α нєαяt ι ηєє∂ нαριηєѕѕ,
tσ нανє нαριηєѕѕ ι ηєє∂ fяιєη∂ѕнιρ
αη∂
tσ нαvє fяιєη∂ѕнιρ ι ηєє∂ υfσяєνєя

जे हाल विच सजना तू राजी ते रब राजी ,जे सी मैहे हार गया तो कि होंदा!
मैहे जीत दा जसन मनाऊंगा, इही जनम विच नहीं पाया अगले जन्म विच पावांगा !
ऐ जिंदगी तुझे जी लेंगे हम !विष दो या अमृत पी लेंगे हम !
आशुओं पर मत जा एक मोका तो दे ,रोते हुए भी हंस लेंगे हम!
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Friday, March 12, 2010

गजल

शीशम सारे बबूल हुए हैं,
अपने ही कांटे शूल हुए हैं।
ताकत पर इतरा रहे थे,
अचानक कैसे गुल हुए हैं।
करतूतों का फल देखिए,
सारे दिग्गज धूल हुए हैं।
बहलाया मीनार दिखाकर,
जुर्म सारे कबूल हुए हैं।
एग्जिट ने फिर की नादानी,
दावे उनके भूल हुए हैं।
शब्द बाण चलाए निशदिन,
वो अंगारे 'कूल' हुए हैं।
दबी जंुबा से उठी चिनगारी,
आंसू ही त्रिशूल हुए हैं।
BHANWAR

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