tσ ℓινє α ℓιfє ι ηєє∂ α нєαяt,
tσ нανє α нєαяt ι ηєє∂ нαριηєѕѕ,
tσ нανє нαριηєѕѕ ι ηєє∂ fяιєη∂ѕнιρ
αη∂
tσ нαvє fяιєη∂ѕнιρ ι ηєє∂ υfσяєνєя

जे हाल विच सजना तू राजी ते रब राजी ,जे सी मैहे हार गया तो कि होंदा!
मैहे जीत दा जसन मनाऊंगा, इही जनम विच नहीं पाया अगले जन्म विच पावांगा !
ऐ जिंदगी तुझे जी लेंगे हम !विष दो या अमृत पी लेंगे हम !
आशुओं पर मत जा एक मोका तो दे ,रोते हुए भी हंस लेंगे हम!
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Friday, March 5, 2010

कितनी रोई होगी रात

कितनी रोई होगी रात
मिलकर, चंद्रमा के साथ
अभी भी दमक रहे आंसू
ओस बनकर।

ठहरो!
नंगे पैर चलते
सहेज लेने दो मुझे
इन बूंदों को,
जो बिछुड गई पलकों से
गनीमत है
बचाए रखा हरी घास ने।

आओ सोचें
रात के दर्द के बारे में
कल्पना करें उन शब्दों की
जिन्हें चंद्रमा ने
दिल रखने के लिए कहे होंगे
रात के कानों में धीरे-धीरे।

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