tσ ℓινє α ℓιfє ι ηєє∂ α нєαяt,
tσ нανє α нєαяt ι ηєє∂ нαριηєѕѕ,
tσ нανє нαριηєѕѕ ι ηєє∂ fяιєη∂ѕнιρ
αη∂
tσ нαvє fяιєη∂ѕнιρ ι ηєє∂ υfσяєνєя

जे हाल विच सजना तू राजी ते रब राजी ,जे सी मैहे हार गया तो कि होंदा!
मैहे जीत दा जसन मनाऊंगा, इही जनम विच नहीं पाया अगले जन्म विच पावांगा !
ऐ जिंदगी तुझे जी लेंगे हम !विष दो या अमृत पी लेंगे हम !
आशुओं पर मत जा एक मोका तो दे ,रोते हुए भी हंस लेंगे हम!
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Saturday, March 6, 2010

भीगते हैं बारिश में

बारिश में बारिश से बडी बात
अकस्मात ही हो रही है बारिश में
अकस्मात ही भीग जाने की होती है इच्छा
भूख है, प्यास है,बरसता पानी है
मगर बुझती नहीं है वह आग
जो, धधक रही है भीतर
बारिश में तो कुछ ज्यादा ही तेज गति
धधकती-सुलगती है वह
संत-ज्ञानी कहते हैं जिसे
प्रेम-अगन
राजनेता कहते हैं बचाए रखो
कूटनीतिक-अनुभव का लाभ मिलेगा
सुशासन कोे ज्यादा तरजीह मत दो
वरना छिन सकता है शासक-पद
शासन करते रहने की यही है पहली शर्त
कि लडते रहो,लडाते रहो
फिर चाहे कितनी ही हो रही हो बारिश
बारिश से ज्यादा बारिश का रंग जानते हैं वे अंग
जो अकस्मात ही भीगते हैं बारिश में।


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