अकस्मात ही हो रही है बारिश में
अकस्मात ही भीग जाने की होती है इच्छा
भूख है, प्यास है,बरसता पानी है
मगर बुझती नहीं है वह आग
जो, धधक रही है भीतर
बारिश में तो कुछ ज्यादा ही तेज गति
धधकती-सुलगती है वह
संत-ज्ञानी कहते हैं जिसे
प्रेम-अगन
राजनेता कहते हैं बचाए रखो
कूटनीतिक-अनुभव का लाभ मिलेगा
सुशासन कोे ज्यादा तरजीह मत दो
वरना छिन सकता है शासक-पद
शासन करते रहने की यही है पहली शर्त
कि लडते रहो,लडाते रहो
फिर चाहे कितनी ही हो रही हो बारिश
बारिश से ज्यादा बारिश का रंग जानते हैं वे अंग
जो अकस्मात ही भीगते हैं बारिश में।



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