प्यार के पहले चरण में दिलबर के दीदार और नजदीकी पाने की तीव्र चाहत दिल की मजबूरी नहीं होती। ये सेक्स के लिए प्रेरित करने वाले टेस्टोस्टरॉन और एस्ट्रोजेन की करतूत होती है। इसके बाद आता है प्यार का वास्तविक चरण। इसमें दिन का चैन गायब हो जाता है। दिमाग की बत्ती गुल हो जाती है। प्यार के इस चरण में आदमी निकम्मा हो जाता है। दिन में भी दिलबर के ख्वाब दिखते है। शरीर की इस हालत के लिए जिम्मेदार डोपामाइन, नोरपीनेफ्राइन और सिरोटोनिन हार्मोन होते हैं। हां प्यार के इस चरण में दिल कुछ ज्यादा ही धडकने लगता है। लेकिन इसके पीछे नोरपीनेफ्राइन हार्मोन होता है। इश्क का तीसरा चरण है लगाव। इसी चरण में प्यार के रिश्ते की डोर मजबूत होती है। एक बार फिर रिश्तों की डोर मजबूत बनाने की जिम्मेदारी हार्मोन ही निभाते हैं। तंत्रिका तंत्र से निकलने वाले हार्मोन ऑक्सीटोसिन और वासोप्रेसीन रिश्तों पर फेविकोल का जोड लगाते हैं। इश्क के हार्मोन ऑक्सीटोसिन की शरीर में कई अहम भूमिका होती है। गर्भवती महिलाओं में ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्तर ज्यादा होता है। सेक्स के दौरान भी ऑक्सीटोसिन का स्तर शरीर में बढा होता है। वैसे तो रिश्तों की डोर मजबूत बनाने वाले दूसरे हार्मोन वासोप्रेसीन का मुख्य काम तो किडनी को नियंत्रित करना होता है। लेकिन जब इश्क का मामला होता है तो इनकी भूमिका बदल जाती है। प्यार का साइंस कनेक्शन अमरीका के रजर्स विश्वविद्यालय की मानवशास्त्री और प्रेम के साइंस कनेक्शन का सिद्धांत देने वाली हेलेन फिशर ने ये खुलासा किया। हेलेन ने बाकयदा इश्क के शुरूआती चरण में डुबकी लगा रहे लोगों को अपने प्रयोग का हिस्सा बनाया। उन्होंने प्रयोग में शामिल लोगों को दिमागी हलचल की तस्वीर दिखाने वाले एमआरआई स्कैनर से गुजारा। इस बीच उन्हें उनके दिलबर की तस्वीर दिखाई गई और उस पर उनकी दिमागी हलचल पर बारीकी से निगाह रखी गई। इस प्रयोग में दिमाग के उस हिस्से में हलचल देखी गई, जो मोटीवेशन और रिवार्ड से जुडा होता है। यानी इश्क के लिए दिमाग मोटीवेट करता है। प्यार के शुरूआती चरण में इमोशन से जुडे दिमाग के हिस्से में कोई हलचल नहीं देखी गई। प्यार में पूरी तरह से डुबकी लगाने यानी दूसरे और तीसरे चरण में ही इस हिस्से में हलचल दिखी। इश्क - चॉकलेट - दिमाग इश्क के शुरूआती चरण में प्रेमी जोडे नजदीकी और करीबी बढाने के लिए अक्सर तोहफे में चॉकलेट देते हैं। हालांकि इसकी कोई खास वजह नहीं होती है लेकिन वैज्ञानिकों ने इश्क और चॉकलेट के रिश्तों पर एक मजेदार खुलासा किया है। इश्क के शुरूआती चरण में दिमाग के दाहिने हिस्से में कुछ-कुछ वैसी ही गतिविधि होती है जैसा चॉकलेट खाने पर होती है। प्रेमी की दिमागी दशा जी हां, वैज्ञानिक शोधों से यह साफ हो गया है कि इश्क में पडे इंसान की मानसिक रोगियों जैसी हरकतें अनायास नहीं होती। प्यार में डूबे इंसान और मनोरोगी की दिमागी दशा एक जैसी ही होती है। दरअसल अगर मेडिकल की भाषा में बात करें तो प्यार में डूबा इंसान एक खास किस्म की बीमारी 'ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर' का शिकार होता है। इश्क के दूसरे चरण में इंसान इस बीमारी का शिकार बनता हैं। इसी चरण में प्रेमी-प्रेमिका में मनोरोग के लक्षण दिखते हैं। दीन दुनिया से बेखबर उसे बस अपने दिलबर की चिंता होती है। दरअसल इस चरण में शरीर में संवेदी सूचनाओं के डाकिए सिरोटोनिन का स्तर 40 फीसदी गिर जाता है। इसका स्तर घटने से इंसान उदासी और चिंता में डूब जाता है। इस चरण में तीव्र कामेच्छा की वजह भी सिरोटोनिन का स्तर गिरता है। दो जीनों का मिलन इश्क क्यों होता है भौतिक विज्ञानी इसे क्वांटम फिजिक्स और एनर्जी से जोडता है। गणितज्ञ इसकी वजह गणितीय फॉर्मूले को बताता है। लेकिन जीव विज्ञानी इसकी वजह जीन को बताते हैं। उनका मानना है प्यार दो दिलों का मिलन नहीं दो इंसानों के जीन के मिलन का मामला है। जीव विज्ञानियों का मानना है कि दो इंसानों के बीच आकर्षण ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजीन की वजह से बढता है। इस जीन के मिलान के बाद ही आकर्षण बढता या घटता है और इस जीन के मिलान का जरिया होती है पसीने की गंध। पुरूषों के पसीने में एंड्रोस्टेडिनोन हार्मोन निकलता है। इस हार्मोन की गंध मिलते ही महिला का दिमाग सक्रिय हो जाता है। दिमाग का अचेतन हिस्सा पसीने की गंध से रोगों से लडने की ताकत और कमजोरी का पता लगाने में जुट जाता है। इसी दौरान दिमाग ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन का भी मिलान करता है। एक अध्ययन में महिलाओं को पुरूषों के टीशर्ट सूंघने को दी गई। इस अध्ययन में सामने आया कि महिलाओं ने ऎसे पुरूषों को पसंद किया जिनके एचएलए पुरूषों के एचएलए से अलग थे। हालांकि गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने वाली महिलाएं इस गंध से प्रभावित नहीं होतीं। ब्रेकअप का मैथमेटिक्स इश्क दिमाग की केमिस्ट्री, दो जीन का मिलन है तो ब्रेकअप शुद्ध गणितीय फार्मूला है। ब्रिटेन में जन्मे और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेम्स मुरे ने ब्रेकअप के इस फॉर्मूले को ईजाद किया है। जेम्स ने दावा किया कि इस फॉर्मूले की मदद से किसी जोडे के ब्रेकअप का सटीक वक्त निकाला जा सकता है। जेम्स ने 700 शादीशुदा जोडों पर यह फॉर्मूला आजमाने के बाद अपना दावा पेश किया। इस फॉर्मूले के तहत सबसे पहले जेम्स और उनकी टीम ने नए शादीशुदा जोडों से कई मुद्दों पर 15 मिनट तक सवाल पूछे। जेम्स की टीम ने जवाबों को अलग-अलग ग्रेड दिए। जवाब देते समय संबंधित व्यक्ति की शारीरिक हरकतों जैसे दिल की धडकन, नब्ज, ब्लडप्रेशर आदि रिकॉर्ड किए गए। जेम्स की टीम ने इन्हीं भावों और शारीरिक हरकतों के आधार पर ग्रेड दिए। जैसे खुशी-खुशी दिए गए जवाबों को पॉजिटिव अंक दिए गए जबकि नाराजगी भरी आवाज या संभलकर दिए जा रहे जवाबों को निगेटिव अंक दिए गए। लव वैक्सीन इश्क के तार केमिस्ट्री और बायोलाजी से जुडे तो मेडिकल विज्ञानियों को चहकने का एक मौका मिल गया। मेडिकल विज्ञानी लव के रसायन और जीन को नियंत्रित करने के ख्वाब देने लगे। कई मेडिकल विज्ञानी तो बाकायदा भविष्य में लव वैक्सीन का दावा करने लगे। अमरीका के न्यूरोविज्ञानी लैरी यंग ने दावा किया कि प्यार के हार्मोन को नियंत्रित कर प्रेमी जोडे के इश्क की तीव्रता को घटाया या बढाया जा सकता है। इश्क की केमिस्ट्री का राज खोलने वाली डॉ. फिशर ने भी इस दावे से इंकार नहीं किया। उनका कहना था कि प्यार के दूसरे चरण को मनोचिकित्सक पागलपन की ही एक दशा मानते हैं और उस दशा में चिंता, डिप्रेशन जैसे हालात से उबरने की दवा भी देते हैं। ऎसे में भविष्य में प्यार को नियंत्रित करने को लव वैक्सीन आ जाए तो डॉ. फिशर को कोई हैरानी नहीं होगी। हालांकि कई मेडिकल विज्ञानी लव वैक्सीन को दूर की कौडी ही मानते हैं। मेडिकल विज्ञानी हार्मोन की जटिल कार्यप्रणाली को इसकी वजह मानते हैं। | ||||
Saturday, March 6, 2010
प्यार का केमिकल लोचा 14 फरवरी 2010, 10:13 hrs IST ईमेल | प्रिंट | कमेंट | टेक्सट |
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